जौनपुर। कभी,कभी ऐसा भी होता कुछ लोग ऐसे भी होते है। जो खुद को बहुत चालाक और होशियार समझते है। खुद को ही सब कुछ समझने लगते है। खूब दिमाग से खेलते है और आनंदित होते है। खेलने वालो का मकसद होता है येन-केन प्रकारेण वर्चस्व बना रहे। दरबार सजा रहे। चरण का वदंन होता रहे। सबकी अपनी,अपनी सोच और फितरत होती है। लेकिन दूसरे किसी को नीचा दिखाने से बचना चाहिए। आज के मानव समाज मे एहसान को कम मानने वाले लोग है। जबकि अगर कोई इन्सान आपके जीवन को सवारता है आगे बढ़ाता है। जब मुकाम मिल जाता है। लोग कामयाब हो जाते है। तब सबसे पहले मार्ग दर्शक को नीचा दिखाने का फीलिंग कराते है। उसके जड़ को ही पूरी तरह से खत्म करने की कोशिश करते है। इधर तो नेकी कर दरिया मे डाल का सिद्धांत खास है। जिसकी जैसी करनी,वैसी भरनी। प्रभुता पाकर कभी बउराना नही चाहिए। धरती पर प्रकृति ही सबकुछ है। पंचभूत के शरीर मे अंहकार किस बात का। धन पद शोहरत कीर्ति अगर किसी के पास है तो उसका स्वभाव दीनता का होना चाहिए। संस्कार मे अदब होना चाहिए। बेअदबी जैसा कुसंस्कार मनुष्य को गर्त की ओर ले जाता है। मनुष्य है तो मनुष्यता को बढ़ावा दीजिए। जिससे मानव का कल्याण हो सके। हालांकि धरती पर अच्छे इन्सानो की कमी नही है। लेकिन उनका कही कद्र नही। यूज किये जा रहे है। फिर दरकिनार कर दिये जा रहे है। चालाक और दिमागी लोग मठाधीशी भी चला रहे है। नैतिकता की जगह अनैतिकता को बढ़ावा दे रहे है। भौकाल टाइट है। सब जगह ऐसे ही लोगो की जय है। मानव है तो मानवता को बढ़ावा दीजिए,दानवता को नही। अच्छे संस्कार का परिचय दीजिए।जिससे कुल परिवार देश का सम्मान बढे। मर्यादित सोच रखिये,मर्यादा मे रहिये। जेडी सिंह संपादक
चालाक और दिमागी लोग कर रहे है मठाधीशी,नैतिकता की जगह अनैतिकता को दे रहे बढ़ावा,नेकी कर दरिया मे डाल का है खास सिद्धांत, अच्छे संस्कार का परिचय दीजिए, जिससे कुल खानदान देश का सम्मान बढे,तुच्छता से बचे यदि मानव है तो








