जौनपुर। श्रम ही जीवन का आधार है। श्रमिक ही भारत का खेवनहार है। विकसित भारत मजदूरो के बगैर अधूरा है। सरकारी,गैर सरकारी कार्यप्राणाली के तहत ठेकेदारी प्रथा ने कामकाजी होनहार युवाओं के वेतनमान में गिरावट की वजह से युवाओं का शोषण हो रहा था। भारत सरकार ने नया मजदूरी दर लागू किया है। जिसका लाभ कंपनीयों, सरकारी संविदा कर्मियों को मिलना ही है। अर्से से श्रमिकों का शोषण हो रहा था। काम तो खूब लिया जाता रहा। वेतन के नाम पर महज खानापूर्ति हो रहा था। उद्योग को बढ़ावा देना भी जरुरी है और मजदूरों को खुशहाल रखना भी है। मालिक और मजदूर मिलकर विकसित भारत का सपना साकार करने की ओर आगे बढ़ सकते हैं। जिसके लिए समन्वय जरुरी है। प्राइवेट कंपनियां अधिकांश ठेकेदारी प्रथा से संचालित है। अधिकांश ठेकेदारों का व्यवहार निर्दयता से भरा होता है। मजदूरों के साथ उनका व्यवहार जानना हो तो करिखयाव फूलपुर वाराणसी में बनास डेरी है जो अमूल दूध के नाम से ख्याति लब्ध हैं। वर्तमान समय में कंपनी के व्यवहार को लेकर धरना प्रदर्शन हो रहा है। सरकार द्वारा लागू वेतन दर की भी मांग है। धरना प्रदर्शन का सोशल मीडिया में वीडियो खूब वायरल है। जिस तरीके की बातें जनमानस के बीच से निकल कर आ रहीं हैं। इससे तो ऐसा लगता अमूल दूध जैसे नामी गिरामी कंपनी के कुछ ठेकेदारों में निर्दयता है। क्रूरता है। मानवता की कमी है। चर्चा परिचर्चा में यह बात आम तौर पर विदित है कि देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अमूल दूध कंपनी का उदघाटन किये है। बाबजूद श्रमिकों के साथ अमर्यादित व्यवहार की बात सोशल मीडिया के रील में देश दुनिया में टहल रहा है। बात तो यहां तक चर्चा में हैं मोदी और अमित शाह के लोगों का बनारस पर पूरी तरह से व्यवसायिक कब्जा हो गया है। उनके लोग जैसा जो चाहते हैं वैसा होता है। अमूल दूध कंपनी के मैनेजमेंट को ठेकेदारों को नैतिकता का पाठ पढ़ाना चाहिए। देश के प्रधान मंत्री का नाम खराब न हो इसका उन्हें ख्याल रखना होगा। श्रमिकों को सरकार द्वारा निर्धारित मजदूरी मिलना चाहिए। यह समय की मांग है। जेडी सिंह
वाराणसी अमूल दूध कंपनी के मैनेजमेंट को ठेकेदारों को पढ़ाना चाहिए नैतिकता का पाठ, श्रमिकों से निर्दयता से न आये पेश,भारत देश के प्रधान मंत्री और गृह मंत्री का हो रहा नाम खराब, भारत सरकार द्वारा लागू वेतन दर अब रोक पाना आसान नहीं, श्रमिकों के बल पर ही है जान और जहान,हे राम










