सतगुरू दर्पण

सच्ची ख़बर… सतगुरू दर्पण | RNI No. UPHIN/2009/30616

शादी विवाह का अवसर,दूध कंपनियों की चांदी,फिर अंधेरी रात, दहीं का डिमांड बढ़ा,मांग पूरा न होने से डिस्टीब्यूटर परेशान,फोन उठाने से कर रहे परहेज

जौनपुर। शादी विवाह का अवसर है। शुभ मांगलिक कार्यक्रमों में अतिथियों के सत्कार के लिए विशेष व्यंजन से मेहमान नवाजी की परंपरा है। जिसमें प्राकृतिक गाय और भैंस के दूध से विशेष मिठाइयां और पकवान बनायें जातें हैं। साथ भोजन को स्वादिष्ट बनाने के लिए दहीं का विशेष प्रयोग होता है। छेना, पनीर, खोवा के साथ दूध से अनेकों प्रोडक्ट तैयार किये जाते हैं। लस्सी, छांछ का इस समय डिमांड है। दूध से बनें प्रोडक्ट बनाने और बेचने के लिए बाजार में अनेकों कंपनीया है। जो अपने अपने डिस्टीब्यूटर प्वाइंट के माध्यम से प्रोडक्ट को ग्राहकों तक पहुंचाकर अपनी सेवा को सुनिश्चित कर रहीं हैं। लग्न के अवसर पर शादी विवाह में दहीं की विशेष उपयोगिता है। दूध की अमूमन कंपनीया 15 और 5 किलो का दहीं बकेट में बेचने का काम कर रहीं हैं। जिसका इस समय विशेष डिमांड है। जिसे पूरा कर पाने में दूध की कंपनियां असमर्थ साबित हो रही हैं। कंपनियो के डिस्टीब्यूटर जनता के मांग के अनुसार अपनी-अपनी कंपनियों में डिमांड भेज रहे हैं। खास करके दही का। कंपनीया डिस्टीब्यूटर को डिमांड के अपेक्षा कम माल दे रहीं हैं। जिससे डिस्टीब्यूटर खासे परेशान हैं। हालांकि कंपनी हो या राजनीति दबंग स्वभाव के लोगों का जलवा है। शरीफ तो बेचारे दर किनार कर दिये जातें हैं। दरअसल दूध कंपनीयों से जुड़े लोगों को शादी विवाह का मौका कमाने का सुअवसर प्रदान करता है। ऐसे में जो डिस्टीब्यूटर कंपनी में पकड़ रखता है या दबंग‌ स्वभाव का है उसे दूध की कंपनियां दूध के प्रोडक्ट आसानी से उपलब्ध करा रही है। उनके डिमांड को तरजीह दिया जा रहा है। जो डिस्टीब्यूटर शरीफ हैं कमजोर है उसके डिमांड को दरकिनार कर दिया जा रहा है। जबकि बारहों महीने वह डिस्टीब्यूटर भी कंपनी के प्रोडक्ट को बेच रहा है। लेकिन जब कमाने का समय है तो कुछ लोग ही कंपनियों के प्रोडक्ट से मालामाल होना चाहते हैं। जीवन के दस्तूर में दबंग स्वभाव के लोग सामाजिक ताना-बाना में हाबी नजर आ रहे हैं। दूध की कंपनियां भी क्या करें। गर्मी के तपिश से गाय और भैंस के दूध के उत्पादन में कमी आयी है। दूध कम है। डिमांड ज्यादा है। ऐसे में जितना दूध किसानों से उपलब्ध हो रहा है। उसी में कंपनियां प्रोडक्ट बनाकर बेच रहीं हैं। दस दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात। जैसे ही लग्न खत्म होगा। दूध दही लस्सी पनीर खोवा छांछ का अभाव सुलभता में तब्दील हो जायेगा। जेडी सिंह संपादक