सतगुरू दर्पण

सच्ची ख़बर… सतगुरू दर्पण | RNI No. UPHIN/2009/30616

अयोध्या राम मंदिर दान चोरी प्रकरण: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दूध का दूध और पानी का पानी करना नहीं होगा आसान, ठीक से जांच हो तो आंच पीएमओ और संघ कार्यालय तक पहुंचने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता

जौनपुर। अयोध्या में राम‌ मंदिर को लेकर घमासान मचा है। दान, चंदा चोरी, कमीशनखोरी को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। बातें बहुत सी हो रही है। जो आम जनमानस में विदित है। विभिन्न राजनैतिक दलों ने भी मोर्चा खोल रंखा है। हर तरीके से भाजपा और संघ को घेरा जा रहा है। राम आस्था कम राजनैतिक मुद्दा बन गये है। जिसमें कुछ राजनैतिक दलों को वोट और सत्ता नजर आ रहा है। भाजपा राम को भज करके जय श्रीराम बोलकर कहां से कहां पहुंच गयी। केन्द्र के साथ कहीं राज्यों में भाजपा की सरकार है। राम सबके है और सबमें हैं।‌ राजनैतिक दलों में अक्सर देखा जाता है। महापुरुषों के विचारों आदर्शो के साथ उनके विरासत को अपनी निजी संपत्ति बनाने की पूरी कोशिश करते है। अनंत: विफलता हाथ लगतीं हैं। महापुरुषों का त्याग,तपस्या बलिदान मानव के लिए हितकारी है। आज वर्तमान समय में राजनैतिक दलों की सोच देश हित कम स्वहित में निहित्त समझ में आती है। जन सेवा का राग अलापने वाले ये दल स्वार्थ भाव में काम करते हैं। परिवारवाद, रिश्तेदारवाद, भ्रष्टाचारवाद को बढ़ावा देना इनका खास मकसद होता है। अयोध्या राम मंदिर भारत देश सहित अनेकों देशों के राम भक्तो के आस्था का केंद्र है। मंदिर लोगों के सहयोग से बना है। मंदिर आंदोलन से बहुतों लोग जुड़े रहे हैं। लेकिन अयोध्या में राम मंदिर बनाने का श्रेय सिर्फ भारत देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और संघ के मोहन भागवत ने लिया। ऐसी राम भक्तों में चर्चा है।भव्य मंदिर बना, बड़े बड़े आयोजन किये गये। जिसमें देश के दो महान हस्तियां विशेष नजर आयें। मंदिर का प्रबंधन पीएमओ और संघ के लोगों के हवाले हैं। बातों में लोग कह रहे हैं। राम मंदिर करोड़ों भक्तों का है। लेकिन दबदबा मोदी और भागवत का है। ऐसा प्रतीत हो रहा है। हिन्दूतत्व का अलख लगाने वाले सनातन योद्धा राम भक्त योगी आदित्यनाथ अयोध्या राम मंदिर दान व चंदाचोरी के मामले में दूध का दूध और पानी का पानी करने की कोशिश करते हैं तो जांच की आंच पीएमओ और संघ कार्यालय तक पहुंच सकता हैं। ऐसी संभावना है। विपक्षी राजनैतिक दल व अधिकांश राम भक्त मोदी और भागवत पर सवाल उठा रहे हैं। जो जिम्मेदार होता है लोग उसी पर सवाल उठाते हैं। ऐसा होता आ रहा है। अयोध्या राम मंदिर में दान चोरी के मामले ने भाजपा और संघ को कटघरे में खड़ा कर दिया है। दूध का दूध और पानी का पानी जबसे नहीं होगा राम भक्तों की आत्मा शुद्ध नहीं होगी। मन में भाजपा और संघ को लेकर संशय बना रहेगा। हालांकि देश के लोगों लिए मोहन भागवत और मोदी पूज्य हैं। लेकिन जबसे राम मंदिर में दान चोरी का मामला लोगों के संज्ञान में आया है लोगों की आस्था आप जन से घटीं है। जबकि योगी के प्रति लोगों की आस्था बढ़ी है। वजह चाहे जो हो यह तो राम भक्त जाने। एक शब्द आता है राजनैतिक अराजकता। इसके तहत लेखक,पत्रकार, समाजसेवी या कुछ समाज के जागरुक लोग जो भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना चाहते हैं उनके मन में एक डर बना रहता है। कहीं राजनैतिक अराजकता के तहत जिन्दगी को हलाल न कर दिया जाय। चोरी की घटनाओं में अखबारों में अक्सर खबर की हेडिंग होती है। चोर करोड़ों का माल लेकर चंपत हो गये,फरार हो गये,नव दो ग्यारह हो गये। राममंदिर दान प‌र चोरों ने हाथ साफ किया। अयोध्या राम मंदिर दान व चंदाचोरी मामले की तह तक जांच होनी चाहिए। चोरों को पावर देने वालों की मानसिकता और सोच राम भक्तों के सामने उजागर होना चाहिए। जगदीश सिंह संपादक