सतगुरू दर्पण

सच्ची ख़बर… सतगुरू दर्पण | RNI No. UPHIN/2009/30616

उस सार्थक मे जो जीना सीख लिया, वह सन्यासी है

एक कहानी मैंने सुनी है—एक था चूहा, एक थी गिलहरी। चूहा शरारती था, दिनभर चीं—चीं करता हुआ मौज उड़ाता। गिलहरी…

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जिसके पास गुरु नही, उसका जीवन अभी शुरु नही

🍁🍁🕉श्री परमात्मने नमः 🙏🙏🍁🍁 गोस्वामी तुलसीदासजी ने एक बड़ी गूढ़ बात कही है रवि पंचक जाके नहीं, ताहि चतुर्थी नाहिं।…

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नृत्य ही पूजा, नृत्य ही ध्यान, आम आदमी आज भी नाच रहा है, सभ्य आदमी नाच भूल गया है

*ओशो:-* नाचने का अर्थ, तुम्हारी ऊर्जा बहे मेरे लिए नृत्य ही पूजा है। नृत्य ही ध्यान है। नृत्य से ज्यादा…

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ईश्वर की शक्ति से संचालित हो रहा सबका जीवन, अहंकार से बेडा गर्त की ओर

जौनपुर। भगवान की महिमा अपरम्पार है। जिसनें उसे सच्चे दिल से याद किया।उसकी हर मनोकामना पूरी होती हैं।जिसकी जैसी आस्था…

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मन को परमात्मा मे लगाना, ध्यान द्वारा चित्त को एकाग्र करना,योग का अर्थ क्रमशः: समाधि, जोड़ और संयमन होता है

पालघर।मुबंई योग शब्द का नाम आने पर जनसामान्य में कुछ शारीरिक क्रिया (आसन) की ही अवधारणा का प्रस्फुटन होता है…

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