जौनपुर। पूर्वाचल के जिलों में हत्या जैसे जघन्य अपराध का पाप बढ़ा है। हत्या के पीछे का रहस्य क्या है। पुलिस अपराध और अपराधियों को लेकर बेहद सतर्क है। हत्या होती है। कुछ न कुछ कारण बनता है। जिसमें पुलिस तमाम पहलुओं पर छानबीन करतीं हैं। सही क्या है, गलत क्या है। न्याई कौन है। अन्याई कौन है। सब कुछ जानने समझने के बाद सत्यता को दर्शाते हुए पुलिस सुसंगत धाराओं में मुकदमा पंजीकृत करती है। घटना को अंजाम देने वाले अपराधी तक पहुंचती हैं। गिरफ्तार करती है। जेल भेजतीं है। पुलिस एक तरफ शांति बना रहे हैं। दंगा,फसाद बलवा न हो इसके लिए मुस्तैदी से काम कर रहीं हैं। इधर कुछ राजनैतिक दलों के नेताओं की कुछ अलग सोच होती है। जिस परिवार के सदस्य की हत्या होती है। उस परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है। माता पिता बहन भाई औरत बच्चे नात रिश्तेदार सब दुःख के साये में जी रहे होते हैं। ऐसे में लाशों पर राजनीति की रोटी सेंकने वाले कुछ राजनैतिक दलों के नेता जातीय उन्माद को बढ़ावा देने का काम करतें हैं। दुखी परिवार को यदि नेतागण आर्थिक मदद पहुंचाने और सही अपराधियों पर कार्रवाई की बात करें तो राजनीति समझ में आती है। कुछ ऐसे भी नेता हैं जो दुःख में आर्थिक मदद करते हैं और न्याय की बात करते हैं। कुछ नेता ऐसे हैं जो जात,पात की बात करते है और जातीओ को लड़ाने के लिए उकसाते हैं। जिससे बवाल मचे और उनकी लाश पर राजनीति की रोटी सेंक,सेंक कर पक जाय। पूर्वाचल के जिलों में कुछ को छोड़ दिया जाय तो अधिकांश राजनैतिक दलों के नेता अपराधी प्रवृत्ति के है। जिनका स्वभाव ही है अपराध को बढ़ावा देना है। पूर्वाचल में वर्तमान समय में अधिकांश हत्याएं राजनैतिक हैं। ऐसा लग रहा है। विधानसभा का आगे चुनाव है। ग्राम पंचायत,क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत का चुनाव भी होने वाला है। ऐसे में अपराधी प्रवृत्ति के कुछ नेता हत्या के माध्यम से जनता में खौफ पैदा करना चाह रहे हैं। नेता लोग बहुत दूर से काम करते हैं। जिससे पुलिस के रडार से बचें रहें। पूर्वाचल में राजनैतिक हत्या के पीछे राजनीति ही काम कर रहीं हैं। पुलिस हत्या की घटनाओं की निष्पक्षता से जांच करें तो अपराधियों के साथ, साथ कुछ राजनैतिक दलों के नेताओं की कारस्तानी भी उजागर हो सकती है। पुलिस सांसद, विधायक, मंत्री, यदि अपराध में लिप्त हो तो कार्रवाई के लिए सौ बार सोचेंगी। अपराध मुक्त भारत के लिए नेताओं का आचरण जबसे पवित्र नहीं होगा अपराध होता रहेगा। ऐसी संभावना है। पुलिस को जातिवादी और राजनैतिक दलों के विचारधारा से दूर रहना चाहिए। ऐसा संभव नहीं है। पुलिस बगैर राजनैतिक दबाव के काम करें तो काफी हद तक अपराध पर विराम लग सकता है। जगदीश सिंह जेडी संपादक
पूर्वोचल के जिलों में हत्या जैसे जघन्य अपराध का पाप बढ़ा,लाशों पर राजनीति की रोटी सेंकने वाले कुछ राजनैतिक दलों के नेता जातीय उन्माद बढ़ाने की कर रहे कोशिश








