सतगुरू दर्पण

सच्ची ख़बर… सतगुरू दर्पण

भाजपा स्थापना दिवस पर विशेष,दुर्दिन से पार्टी को विश्व स्तरीय पहचान देने वाले जमीनी कार्यकर्ताओं की जनता में है अलग पहचान,कोई सम्मान दे या न दे,वे खुद में है माननीय से बढ़कर सम्माननीय

जौनपुर। भाजपा का स्थापना दिवस:पार्टी को इस मुकाम तक पहुंचाने में,उपेक्षित,पीड़ित,असहाय,लाचार कार्यकर्ताओं,का विशेष योगदान है। पार्टी को मजबूती देने में पुराने कार्यकर्त्ताओं,पदाधिकारियों ने अहम रोल निभाया है।आज वह किस हालत में कैसे जीवन,यापन कर रहे हैं।उनकी स्थिति,परिस्थिति क्या है। इससे भाजपा सरकार और उसके संगठन के पदाधिकारियों को कुछ लेना-देना नहीं है। भाजपा अनुशासित,मर्यादित पार्टी है। जिसके विचारधारा में मानव हित के साथ राष्ट्र हित जुड़ा है। भाजपा जहां विश्व की सबसे बड़ी पार्टी है। आज भारत देश के तकदीर और तस्वीर को बदल दिया है। कोई माने या ना माने बदलाव दिखता है। जिन पुराने कार्यकर्त्ताओं और पदाधिकारीओ के बल पर भाजपा आज समूचे ब्राहमान्ड में छा गयी है। उनके दिल में झांकें,महसूस करें,अनुभव करें तो साफ,साफ पीड़ा की अनूभूति होती हैं। पुराने कार्यकर्ता, पदाधिकारी बातचीत में जब पीड़ा व्यक्त करते हैं तो दिल पसीज जाता है। सब-कुछ के बाद वह भाजपा के साथ तन्मयता से जुड़े हैं। मतदान करते हैं। पार्टी के नीतियों का प्रचार, प्रसार करते हैं। भाजपा में गुटबाजी चरम पर है। चाहे जो सांसद,विधायक,मंत्री हो सबका अपना,अपना गुट है। गुटबाजी के हिसाब से संगठन में पदाधिकारी बनते हैं। जिसमें धनबली जैसे मानिंदो को अहम स्थान मिलता है। यहीं वह गरीब कार्यकर्ता व पदाधिकारी अपने को ठगा महसूस करता है और पार्टी को कोसता है। जिस जमीनी कार्यकर्ताओं का उपेक्षा हो रहा है। वहीं पार्टी के रीढ़ है। भाजपा में भवकाल हावी नजर आ रहा है। भाजपा का अगर कोई मजबूत सेबंल वर्तमान समय में कोई है तो मोदी जी और योगी जी है। भाजपा इनके व्यक्तित्व को चाहे जितना भुना ले। आगे का समय बहुत ठीक नहीं रहेगा। इसकी प्रबल संभावना है। भाजपा का भयमुक्त समाज का नारा सफल साबित हुआ है। देश की सुरक्षा में भाजपा के हाथों देश सुरक्षित है। भाजपा में पहले ईमानदारी थीं। अब काफी हद तक बेईमानी की बू आ रही है। भ्रष्टाचार मुक्त भारत में पार्टी विफल है। जहां भाजपा के जमीनी कार्यकर्ता भाजपा के पवित्र संस्कार को आगे बढ़ा रहे हैं। वहीं बहुतों ऐसे धनबली,बाहुबली, सफेदपोश भाजपा नेता अपना आर्थिक साम्राज्य और अपना बजूद बढ़ा रहे हैं। उनसे भाजपा से बहुत मतलब नहीं है। उनका मकसद सत्ता सुख है। जब तब भाजपा का जलवा है। वहां मलाई काट रहे हैं। भाजपा का जब दुर्दिन देखेंगे। सपा का माहौल ठीक देखेंगे तो उधर हो जायेंगे। बसपा का माहौल ठीक है। उधर हो जायेंगे। भारतीय रुपये की ताकत पर राजनीति का परिभाषा बदलता रहता है। वर्तमान में भाजपा के स्थापना दिवस पर संकल्प होना चाहिए दुर्दिन में भाजपा का साथ देने वाले पुराने कार्यकर्त्ताओं,नेताओं,पदाधिकारियों,जमीनी कार्यकर्ताओं को पार्टी में उचित सम्मान मिलना चाहिए। भाजपा का सबका साथ,सबका विकास का नारा काफी कारगर था। लोगों का काफी आत्मिक जुड़ाव था। लेकिन भाजपा के कुछ ऐसे कारनामे सामने आये। जिससे लोगों का मन पार्टी से खिन्न होता नजर आ रहा है। ब्लाकों, तहसीलों, ग्राम सभाओं में भ्रष्टाचार है। यह कह लीजिए कहां भ्रष्टाचार नहीं है। यह क्यों है। इसके लिए जिम्मेदार कौन है। भाजपा के केंद्र और राज्य सरकार को सोचना चाहिए। सभी नेता,अधिकारी और कर्मचारी भ्रष्ट नहीं होते। कुछ लोग होते हैं जो सत्ता को रुपयों के बल पर अपनी जेब में रखते हैं। शासन, प्रशासन की कमीशनखोरी की पंरपरा जग जाहिर है। चंदा वसूली जैसे कार्यक्रम सत्ता के नाम पर धड़ल्ले से चल रहा है। इसका हानि तो भाजपा को होगा। यह सब अर्से से हो रहा है। भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई आवाज उठाये। देखिये उसकी दशा क्या होती है। उसका जीना हराम कर दिया जायेगा। दबाव दिया जायेगा, नहीं मानें तो लालच दिया जायेगा,उससे नहीं मानें तो दरकिनार हमेशा लिए कर दिया जाय सकता। यह भी हथकंडा अपनाया जाता है अपराधियों से हमला करवा दिया जा सकता है। पुलिस थाने में मुकदमा भी दर्ज करवाया जा सकता है। भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रिन्ट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लोग मौन क्यों हैं। उन्हें भी कहीं न कहीं से भय है। सत्ता का राग अलापना उनकी मजबूरी है या और कुछ, यह सवाल बनता है। लेकिन पूछें कौन। भारत देश महान है। जिसकी दुनिया के सब देशों से अलग गरिमा है। भारत विकसित राष्ट्र के रुप में देश दुनिया में आम तौर पर विदित हो रहा है। भारत शांति प्रिय देश है। जो दुनिया को शांति प्रदान कर रहा है। विश्व बंधुत्व भारत की खास पहचान है। भारत की अनेकता में एकता है। राष्ट्रीयता का बल है। वर्तमान समय में दुनिया के हालात ठीक नहीं है। गोला,बारुद से दुनिया के अनेकों देश जल रहे हैं। आंच से देश प्रभावित हैं। ऐसे मे हम सभी मिलकर राजनीति की भाषा को छोड़कर एकता पर बल दे। एक दूसरे का सहयोगी बनें। मानवता का परिचय दें। विपदा पूछकर नहीं आती। इसके लिए तैयार रहें। ईश्वरीय शक्तियां भारत देश के हर नागरिकों की रंक्षा के लिए तत्पर है। बस जरुरत है याद करने की। जब हर क्षण ईश्वर को याद करेंगे तो दया तो मिलेगी ही। जगदीश सिंह,जेडी संपादक