सतगुरू दर्पण

सच्ची ख़बर… सतगुरू दर्पण | RNI No. UPHIN/2009/30616

भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना अमृत सरोवर को लगा ग्रहण,जौनपुर के रामनगर ब्लॉक में भ्रष्टाचार की सारी सीमा पार, लुटेरों की फौज कर रहीं मौज

जौनपुर। भारत सरकार की अमृत सरोवर योजना रामनगर ब्लॉक क्षेत्र में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गयी हैं। जल संरक्षण को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट को दूर करने के लिए शुरू की गई एक महत्वाकांक्षी योजना को भ्रष्टाचार का ग्रहण लग गया है। मिशन अमृत सरोवर की शुरुआत 24 अप्रैल 2022 को ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ के उपलक्ष्य में की गई थी। योजना पर गौर किया जाय तो अधिकांश तालाब के‌ काम अधूरे हैं।‌ महज कुछ तालाब रमणीय हैं। जो उद्देश्य को पूरा कर रहे हैं। बहुतों तालाब सूखे है कुछ में जल भरा है। कुछ ग्राम सभा ऐसे भी हैं जहां तालाब खोदें ही नहीं गये है।‌ सरकारी खजाना खाली कर दिया गया है। जिसकी इन दिनों खूब चर्चा है। विकास का कागजी घोड़ा तो खूब दौड़ा है। रामनगर ब्लॉक में जांच के नाम पर भी वसूली है।‌ लखनऊ, दिल्ली, जौनपुर से बहुतो बार जांच टीमें आयीं। चर्चा,परिचर्चा में बात जनमानस में विदित हुआ। वर्षो पुरानी परंपरा के तहत जेब गरम हुआ।‌ जांच में सब-कुछ फीट हो गया।‌ इस ब्लाक में चंदा की भी वसूली जमकर होती है।‌ दबी जुबान लोग कहते हैं और चंदा भी देते हैं।पर्यावरण संरक्षण के लिए सरोवर के चारों ओर नीम, पीपल और बरगद जैसे छायादार और पर्यावरण के अनुकूल पेड़ कहीं,कहीं लगें हैं। जो रख रखाव के अभाव में सूखने की ओर है। प्रत्येक अमृत सरोवर स्थल पर स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) के मौके पर झंडा फहराने की परंपरा को बखूबी निभाया जा रहा है। अमृत सरोवर योजना यदि सफलीभूत हुआ होता तो आज ग्राम पंचायतों का नजारा बदला, बदला होता। दो चार अमृत सरोवर ऐसे भी हैं जिसे देखने पर मन को सुकून मिलता है। रामनगर की खास बात है यहां राजनीतिज्ञ कम व्यवसायी ज्यादा है। जिनका उद्देश्य आर्थिक साम्राज्य खड़ा करके बड़ा लीडर बनने का है।‌बहुतो ग्राम सभा के जनप्रतिनिधि अपने मिशन में सफल है। जिनके बंगले अपने जिले के अलावा मुंबई और वाराणसी शहर में भी बनने की चर्चा है। अधिकारी भी यहां धन लूटने में पीछे नहीं है। यदि ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी यहां होते तो आज ब्लॉक भ्रष्टाचार मुक्त होता। लोग कहते हैं यहां अच्छे अधिकारी आते हैं। माहौल देखने के बाद खुद स्थान छोड़ देते हैं। जो अधिकारी यहां के रस्मों रिवाज में रम जाता है वह जाना भी नहीं चाहता। यदि शासन हटाना भी चाहता है तो धनबल की ताकत से पद पर बने रहने की चेष्टा बरकरार रहता है। वस्तुत: अधिकारी की मंशा पूरी हो जाती है और फिर भ्रष्टाचार का खेल खिलाड़ीओ के साथ शुरू होता है। अक्सर जनमानस में भ्रष्टाचार को लेकर चर्चा होती है। लोग कहते हैं भ्रष्टाचार कभी खत्म नहीं होगा। कम हो सकता है। जेडी सिंह