जौनपुर। हिन्दी पत्रकारिता की आज भी अपनी विशिष्ट पहचान है। गरिमा है। प्राकृतिक संरचना में रचानात्मकता ,जनचेतना , राष्ट्र चेतना,विश्लेषण, विवेचना,ज्ञान विज्ञान ध्यान की परख अखबार की अपनी पहचान है। पत्रकार और पत्रकारिता मानव समाज का मार्ग दर्शक है। आईना है। जिसमें हर रुप रस गंध का दर्शन है। पत्रकारिता पहले शुद्ध रूप से न्याय और सत्य पर आधारित था। आज भी है लेकिन स्वरूप काफी बदला नजर आ रहा है। पत्रकारिता में आज चाटुकारिता का विशेष स्थान है। मैनेज शब्द से पत्रकारिता काफी हद तक प्रभावित हैं।मैनेज शब्द राजनीतिज्ञ हैं। जिससे देश की राजनीति चल रही है। खबरें मैनेज हो रहीं हैं। पत्रकारिता की खबर वाली नीति अब राजनीति से प्रेरित है। पत्रकारिता पर राजनीति पूरी तरह से हाबी है। भ्रष्टाचार चरम पर है। जिसमें अधिकांश सरकारी तंत्र और अधिकांश नेता लिप्त है। भ्रष्टाचार के खिलाफ गिनें चुनें अखबार है जो खबर छाप सकते हैं। अधिकांश अखबार मैनेज वाली पत्रकारिता को बढ़ावा दे रहे हैं। यदि भ्रष्टाचार के खिलाफ पत्रकार की कलम चल भी गयी तो खबर को दरकिनार कर दिया जायेगा। अखबार को सरकारी विज्ञापन भी तो चाहिए। अखबार चलेगा कैसे। फाइनेंशियली व्यवस्था भी तो होनी चाहिए। गुण दोष की धरती पर संतुलन वाली पत्रकारिता सफल है। जिसमें कोई रिस्क नहीं है। सच्ची पत्रकारिता जोखिम भरा है। वर्तमान समय में सबसे दयनीय हालत अखबार, पत्रकार और पत्रकारिता का है। पहले लोग पत्रकारो का सम्मान करते थे। आज लोग अपमान करते हैं। हें दृष्टि से देखते हैं। आज के पत्रकारो में जो जीनियस, अनुभवी हैं।वह पत्रकारिता से दूर होते जा रहे हैं। पत्रकारिता कर भी रहे हैं तो सम्मान जनक तरीके से। आज तो अमूमन लोग पत्रकार हैं। सबका अपना सोशल मीडिया पर प्रभाव है। जो मन में आ रहा है सो लिख रहे हैं। कभी,कभी सोशल मीडिया की वायरल खबर अराजकता फैलानें का माध्यम बन जाता है। जिस पर सरकार को संज्ञान लेना पड़ता है। साकारात्मक खबरों का चलन कमजोर पड़ा है। नाकारात्मक खबरों का दौर चल रहा है। भारत देश के लिए सोशल मीडिया घातक है। समय रहते सरकार नहीं जागी तो वह दिन दूर नहीं जब देश के लोगों का हृदय परिवर्तन हो सकता है। जिससे भारतीय संस्कृति, सभ्यता विलुप्त हो सकता है। जिसके स्थान पर विदेशी संस्कृति लोगों के जेहन में घर कर सकता है। आज की पत्रकारिता राजनैतिक आराजकता की भेंट चढ़ गयी हैं। निष्पक्ष पत्रकारिता करना आसान नहीं है। सत्य लिख नहीं सकते। सोशल मीडिया की खबरें अविश्वसनीय भ्रामक है। बाबजूद अमूमन लोगों की पसंद है। प्रिन्ट मीडिया का बहुत बड़ा साम्राज्य मिटता नजर आ रहा है। अब अखबार कम लोग पढ़ना चाहते हैं।अखबारो का प्रसार तेजी से घट रहा है। टेलीविजन और रेडियो की खबरों को भी कुछ हद तक लोग देख और सुन रहें हैं। अखबार हम सबका विरासत है। जिसे बचाने के लिए हम सबकों आगे आना होगा। जेडी सिंह/ घनश्याम दूबे
राजनैतिक अराजकता की भेंट चढ़ी पत्रकारिता, सोशल मीडिया भारत देश के लिए घातक,अखबार आपका है विरासत,वजूद बचाने के लिए सब लोगों को आना होगा आगे








