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प्रयागराज कुंभ मे भगवान है उपस्थित, मन निर्मल है तो मिल सकती है अनूभूति

कुंभ नगरी। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज मे शाही स्नान के बाद दुनिया का सबसे बडा़ धार्मिक आयोजन कुंभ मेला शुरु हो गया है। आस्था लिए पूरी दुनिया से लोग खींचे चले आ रहे है। धरती माता का प्रताप ही है जो कि आस्था का सैलाब कुंभ दर्शन को उमड़ रहा है। यथार्थ गीता कैम्प में स्वामी अड़गड़ानन्द महाराज ने अमृतवाणी की वर्षा करते हुए श्रद्धालु भक्तों के बीच कहा कि मानव जीवन भगवान को याद कर आंख से अश्रुपात हो जाये तो समझो भजन की शुरुआत हो गयी। एक बार अगर भजन शुरू हो गया तो उसका कभी नाश नही होता है। एक परमात्मा के भजन से मनुष्य के जीवन से दुःख दूर हो जाता है। साधक जैसे. जैसे भजन करेगा माया से दूर होता जायेगा। भजन से शरीर के अंदर के विकार दूर हो जाते है। भगवान की ओर से साधक को अनुभूत मिलने लगती है। साधक उसी के सहारे आगे बढ़ता जाता है। एक दिन ऐसा आता है जब उसे प्रभु से साक्षात्कार हो जाता है। साधना का लव लगते ही प्रभु हृदय देश में जागृत हो जाते है। फिर वही साधक की रक्षा करने लगते है। इसके पूर्व तानसेन महाराज ने सतसंग के दौरान प्रयागराज की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि तीर्थराज प्रयाग के दर्शन मात्र से करोड़ों जन्म का पाप कट जाता है। मतलब परमात्मा मे प्रेम का होना ही प्रयागराज है।
यथार्थगीता कैम्प में जयप्रकाश बाबा जी, बच्चा बाबा जी, गिरी बाबा जी, राजेस्वरानंद जी, राजाराम महाराज जी, और सोहम बाबा का भी सतसंग हुआ।
इस अवसर पर परमहंस आश्रम के और भी संत भावानंद जी महाराज, लाले बाबा जी, पप्पू बाबा जी, संतोष बाबा जी, कुँवर बाबा जी, मौनी बाबा जी सहित हजारों भक्त उपस्थित रहे।

जेडीसिंह सतगुरु धाम

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