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गुजरात लाबी भाजपा को ले डूबेगी,मोदी और अमित शाह के शह,मात के खेल में योगी और अखिलेश हुएं बेहद मजबूत, राहुल और मायावती का बढ़ा कद, राम जाने

जौनपुर। भाजपा का अच्छे दिन से बुरे दिन आ सकतें हैं। उत्तर प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों में भाजपा के राजनैतिक विचारधारा से लोग असंतुष्ट नजर आ रहें हैं। पहले भाजपा को लोग जनता का हितैषी मान रहे थे। लेकिन अब अधिकांश लोग यह कह रहे हैं भाजपा सनातन धर्म के नाम पर राजनैतिक रोटी सेंक रहीं हैं। उसका मकसद येन,केन प्रकारेण सत्ता में बने रहने का है। सबका साथ, सबका विकास का नारा थोथा साबित हो रहा है। मोदी और अमित शाह से लोग बेहद नाराज हैं। उत्तर प्रदेश के गांवों का अमूमन इन्सान यह कहना शुरु कर दिया है उत्तर प्रदेश राज्य पर गुजरात लाबी ने पूरी तरह से कब्जा कर लिया है। चाहे व्यापार हो, नौकरी हो, इन्डस्ट्रियल एरिया हो,शिव नगरी,बनारस, रामनगरी अयोध्या में गुजरात के लोगों का बोलबाला है। यूपी में मुख्यमंत्री के कार्य से अधिकांश लोग संतुष्ट तो बहुतों लोग असंतुष्ट हैं। यह भी कहां जा रहा है गुजरात लाबी सपा के अखिलेश यादव के पीडीए के नारा को कमजोर करने के लिए उत्तर प्रदेश में सवर्णों को सवर्णों से, ओबीसी को ओबीसी से और दलितों को दलितों से लड़ाकर अपना वोट बैंक तैयार करने के फिराक में है। गुजरात लाबी की मन्शा यूपी के लोग अच्छी तरह से समझ चुकें हैं। अमित शाह यह सोच रहे हैं यूपी में भाजपा मजबूत रहेंगी तभी दिल्ली का तख्त भी बच पायेगा। मंशा प्रधानमंत्री बनने का है। तभी तो राजनैतिक फितरत से अमित शाह सबकों मात देने की कोशिश कर रहे हैं। गुजरात लाबी के शह मात के खेल में योगी और अखिलेश यादव दोनों मजबूत हुए हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती ने सधी राजनीति से जनता के बीच खुद को स्थापित करने में कामयाब हो रहीं हैं। कांग्रेस के राहुल गांधी का भी कद बढ़ रहा है। भाजपा से उसके अधिकांश कार्यकर्ताओं में भी अनद्रोनी नाराजगी हैं। दलीय गठबंधन की राजनीति और राम के सहारे भाजपा सत्ता की मलाई काट रहीं हैं। जो ज्यादा दिन तक नहीं चल सकता। दशा दस साल,चाल चालीस साल का देहाती कहावत है। भाजपा में पहले कार्यकर्ताओं का सम्मान था। लेकिन इधर बाहरी घुसपैठियों ने भाजपा में मजबूत स्थान बना लिया। पुराने कार्यकर्त्ताओं की पूंछ घट गयी है। जिससे भाजपा नेता, कार्यकर्ता आहत हैं। भविष्य के राजनैतिक मजबूती के लिए भाजपा को जोड़ने की राजनीति करनी होगी और सवर्णो का विश्वास जीतना होगा। अभी ओबीसी और दलित भाजपा पर उतना विश्वास नहीं करते जितना सवर्ण कर‌ रहे थे। यूपी में अनुप्रिया पटेल ओबीसी की मजबूत लीडर हैं। सुभासपा के ओमप्रकाश राजभर अपने समाज के लीडर है। निषाद पार्टी का अपना नेता है। ऐसे में देखा जाय तो यूपी में भाजपा का सवर्ण ही खेवनहार है। इन्हीं की वजह से दिल्ली का तख्त भी है। जेडी सिंह संपादक

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