सतगुरू दर्पण

सच्ची ख़बर… सतगुरू दर्पण | RNI No. UPHIN/2009/30616

सोशल मीडिया देश के संप्रभुता के लिए है खतरा,आजादी का जंग जीतने में अखबार की रहीं हैं विशेष भूमिका,भारतीय साहित्य है जनमानस के लिए संजीवनी,अशोक सिंह सेउर

जौनपुर। डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म सच्चाई कम झूठ की ओर विशेष तौर से अग्रसर है। फितरत बाज मनगढ़ंत कहानी बनाकर देश के लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। सोशल मीडिया की देन है भारत के मूल स्वभाव, जिसमें धर्म और शर्म की प्रधानता है। धर्म का मतलब अच्छाई को धारण करना है। शर्म में भी अदब है। लाज है। कुसंस्कार पर चेतावनी हैं। कभी एक दौर था अच्छे लेखकों के पुस्तको को पढ़ा जाता था। जो मानव समाज के लिए संजीवनी का काम करता था। आज रील का दौर चल रहा है। जिसमें में भारतीय संस्कार,संस्कृति पर कुठाराघात किया जा रहा है। पाश्चात्य संस्कृति को जन,जन पर थोपा जा रहा है। तरह, तरह के मुहिम चलायें जा रहें हैं। अराजकता का माहौल देश में उत्पन्न किया जा रहा है। जिससे देश की व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो,अशांति का माहौल उत्पन्न हो। खास करके युवाओं को अपने भविष्य को संवारने के लिए खुद सोचना पड़ेगा। भाग्य का उदय तभी होगा। जब अच्छे कर्म होंगे। श्रम होगा। बौद्धिक चिन्तन होगा। युवा देश के भविष्य हैं। आज और कल है। आज युवा ही देश की दिशा और दशा को तय कर रहे हैं। चित्रकार, पत्रकार,कहानीकार, साहित्यकार सामाज में रचनात्मक सृजनात्मक कार्यो से सभ्य,मर्यादित, सुसंपन्न,सुव्यवस्थित, सुसंगठित,आचरण को जन्म देते थे। एक ऐसी विचारधारा जिसमें राष्ट्र और राष्ट्रीयता का भान हो। आपसी भाईचारा और प्रेम की प्रकृति बनें। सोशल मीडिया कुछ मायने में ठीक हो सकता है लेकिन बहुत से मायने में देश के संप्रभुता के लिए खतरा मालूम पड़ता है। आजादी का जंग जीतने में अखबार की महत्वपूर्ण भूमिका रहीं हैं। क्रांतिकारियों को संदेश पहुंचाने का माध्यम रहा है। आज भी सोशल मीडिया के वनस्पति अखबार ही विश्वसनीय है।