सतगुरू दर्पण

सच्ची ख़बर… सतगुरू दर्पण | RNI No. UPHIN/2009/30616

सावन के पावन महीने में बर्राह शिव मंदिर से बाहर किये गये भोलेनाथ,सोमवार को बुलाये गये वापस,रुद्राभिषेक कर किया गया प्रसन्न

सतगुरु धाम। जौनपुर। रामनगर विकास खण्ड के बर्राह गांव के तालाब के पास स्थित सिद्धपीठ शिव मंदिर शिव भक्तों के आस्था का केंद्र हैं। अति प्राचीन मंदिर का ऐतिहासिक महात्म हैं। जहां घोर साधना हुई है। विचरण पर निकले साधु संत महात्मा दिव्य भव्य नव्य स्थान पर ठाव लेते हैं और शिव दर्शन से अभिभूत परम आनंद में साक्षी भाव में भगवान शंकर के दर्शन का अनुभव करते हैं। गांव के ही शिव भक्त बाबा हरिहर दास की तपोभूमि सावन माह में खुद ब खुद से जगमगा उठीं। चेतना की लहर उठी। शिव बाबा पांच फुट नीचे से सात फुट ऊपर आ गये। गांव के लोगों में शिवभक्ति जागी। भोले नाथ ने सबको जगाया। चेताया, प्रेरित किया। बोलें मेरे भक्तों उठों मंदिर का जीर्णोद्धार करों। लय बना। ताल बना। गांव के अमूमन लोगों का सहयोग मिला। एकाध,दो लोगों को छोड़कर। हो सकता है शिव शंकर उनसे कुछ और काम लेना हो। इसलिए छोड़ कर रंखे हो। मर्जी बाबा की। मंदिर से भोले नाथ को कुछ दिन के लिए बाहर किया गया था। पीपल के पेड़ के नीचे घोर साधना में थे। इधर भव्य शिव मंदिर बनकर तैयार था।भोले नाथ पहले जीर्ण शीर्ण मंदिर में प्राचीन काल से विराजमान थे। उनकी इच्छा हुई। हरिहर दास की तपस्या उद्धत हुई। बनाव बना। समय का फेरा घुमा। गांव का अपरबल सहयोग मिला। लाखों रुपए की लागत से मंदिर का निर्माण हुआ। मंदिर निर्माण के बाद शिव लिंग लगभग पांच फुट नीचे था। जिसे विद्वान ब्राह्मणों ने वैदिक विधान के तहत शिवलिंग को सहजता, विनम्रता, आग्रह, निवेदन, प्रार्थना से शिवलिंग को उखाड़ा और ऊंचाई दी। भाव ऐसा। भक्ति ऐसी। मूर्ति खंडित नहीं हुआ। मूर्ति को पीपल के पेड़ के नीचे रंखा गया। दस अगस्त 2026 सोमवार को गोथू के पूज्य संत श्री जय प्रकाश तिवारी जी महाराज ने वैदिक मंत्रों से शिवत्व का आह्वान किया और शिव लिंग की पुनः स्थापना हुई। पहले के नंदी भगवान शिव के साथ मंदिर में हैं एक और नंदी बाहर में स्थापित हुए हैं। समय की अपनी महिमा हैं। क्या राजा,क्या रंक,क्या फकीर,क्या साधु,संत गति सबकी एक है। पंचभूत की शरीर मिट्टी में मिल जाना है। अहंकार ही भोले नाथ का आहार है। प्रसाद रूप में भक्ति का आचरण करिये। अहंकार मत करिये। विश्वनाथ सिंह के पुत्र अशोक सिंह ने कहा जो किया सो हरि ने किया। भये कबीर,कबीर,जो किया भोलेनाथ ने किया। गांव के अमूमन लोगों को प्रेरित किया। निश्चित तौर पर गांव के सभी लोगों को साधुवाद है। इस नेक कार्य के लिए। आगे के सोच में और कुछ अच्छा होगा। ऐसी संभावना है। बाबा हरिहर दास के पंचतत्व में विलीन होने के बाद। मंदिर में सुबह शाम पूजा पाठ भजन आरती के क्रम में गांव के लोगों की विशेष आस्था रहतीं हैं। पूजा,पाठ का क्रम चलता रहता है। यदि ऐतिहासिकता की बात करें तो बताया जाता है कि शिवलिंग की स्थापना पूर्व प्रधान दयाशंकर सिंह के आजी के हाथ से हुआ है। वैसे देखा जाय तो सुबह से देर शाम तक गांव के कुछ महात्मा लोग शिव मंदिर व सामने के चबूतरे पर बैठे शिव की साधना करते हैं। गांव की महिला अक्सर समूह में शिवचर्चा वर्षो से करतीं आ रहीं हैं। सोमवार को पूजा पाठ के बाद दिव्य भणडारा देर रात तक चला। कार्यक्रम में मनबोध सिंह, छेदी सिंह, जिलेदार सिंह, सुरेन्द्र प्रताप सिंह,डा.राजेश सिंह पवार,राय साहब सिंह, उदयभान सिंह, ज्ञानी सिंह, शिवपूजन सिंह,जय प्रकाश सिंह, वीरेन्द्र सिंह,राजेश सिंह,कल्लू सिंह, हवलदार सिंह, शक्ति सिंह, रवीन्द्र सिंह पप्पू, वकील सिंह, मोहन सिंह, निगम सिंह,नन्हे सिंह,सन्हे सिंह,टी. सिंह,धुरंधर सिंह, लोंदे सिंह,दशरथ सिंह, आनंद सिंह,प्रमोद सिंह, कैलाश सिंह,अमृत लाल यादव,मुन्नू गुप्ता,सुनील सिंह पथरु,शतीश सिंह,खुनखुन सिंह,मनोज सिंह सहित गांव के अमूमन लोग उपस्थित रहे। पूजा में बाबा लुटटुर सिंह,सुनील सिंह,प्रदीप सिंह,हरेंद्र प्रताप सिंह, देवेन्द्र प्रताप सिंह की गरिमामयी उपस्थिति आकर्षक रहीं। दिलीप सिंह (रबीस ) महंत की भूमिका में नजर आयें। मंदिर निर्माण में आपके प्रबंधन की तारीफ गांव के अमूमन लोगों ने किया। स्व.अखिलेश सिंह के योगदान को भी लोगों ने याद किया। रामसमुझ सिंह के धर्मार्थ कार्य की सराहना रहीं। अरविंद सिंह ऐडोवोकेट और हरेन्द्र प्रताप सिंह मंदिर निर्माण में हर संभावनाओं को तलाशा। जिससे मंदिर भव्य बन सकें। सतगुरु धाम के दास जगदीश को नापसंद करने की प्रकृति गांव के कुछ लोगों में बरकरार है। जो आभास कराया जाता है। गांव के सभी लोगों का वंदन है। अभिनंदन है। धन धन सतगुरु तेरा ही आसरा,जय जिन्दा राम