जौनपुर। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भारत देश के सबसे लोकप्रिय नेता माने जा रहे है। जिनके लिए राजनीति मे पक्ष और विपक्ष समान है। जात, पात धर्म, मजहब से उपर की सोच रखते है। मानवता और इन्सानियत की बात करते है। सत्यवादी है। न्याय प्रिय है।कार्यशैली ऐसा है कि लोगो का दिल खुश हो जाता है। मर्यादित संस्कार है। जिससे देश के अमूमन पार्टी के कार्यकर्ता,नेता, सासंद, विधायक, सम्मान करते है।स्पष्ट वक्ता है। एकदम क्लीयर बोलते है। सवाल का जवाब वेवाकी से देते है। भाजपा की शान है। देश की मान है। लोगो के दिलो मे बसने वाले है। इधर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कोई जोड़ ही नही है। राजनीति मे इतनी लंबी लकीर खींच दिये है कि आने वाले दिनो मे चहुदिश, चहुंओर मोदी ही मोदी का डंका बजेगा। देश बदला,सोच बदला,गरीबी दूर होने की ओर है। तीसरी बार मोदी का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय है। मतदाताओ मे उल्लास है। भविष्य का रास्ता भी साफ है। गुजरात लाबी की राजनीति सबसे सफल है। उत्तर प्रदेश मे आर्थिक, धार्मिक, राजनैतिक मूलत: इन तीनो चीजो पर आधिपत्य लगभग होने की ओर है। देश विदेश मे गुजरात के उद्योगपतिओ का बोलबाला है। शिवराज सिंह चौहान,मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री,राजस्थान की पूर्व मुख्य मंत्री बसुन्धरा राजे सहित बहुत से भाजपा नेता किनारे कर दिये गये। आगे भी बहुत से नेता किनारे हो सकते है। जैसा कि राजनैतिक गलियारे और सोशल मीडिया मे चर्चा है। जैसे राजनाथ सिंह,नितिन गड़करी,उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के अलावा कुछ भाजपा के राष्ट्रीय नेता हाशिए पर जा सकते है। योगी के सामने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को बढ़ावा मिल रहा है। भाजपा के राजनैतिक चाणक्य कहे जाने वाले अमितशाह ने तो राजनीति मे धूम मचा दिया है। इन्हे मोदी का हनुमान कहा जा सकता है।तीसरी बार प्रधान मंत्री मोदी के बनने के प्रबल आसार है। 2029 मे अमितशाह प्रधानमंत्री बनेगे ऐसा अटकल अभी से लगने लगा है। भारत मे जो राजनैतिक बिसात है गुजरात आधारित है। देश का भला है। पूँजीपतिओ को बढ़ावा है। गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालो का जीवन स्तर उपर उठ रहा है। एंड्रॉयड मोबाइल चला सकते है। अच्छे से नहा खा सकते है। आर्थिक रुप से संपन्न नही हो सकते है। मध्यम वर्गीय परिवार आर्थिक रुप से विपन्न है। जिसे प्रोत्साहित न करके हतोत्साहित किया जा रहा है। निविदा की नौकरी मे महज शोषण है। आउट सोर्सिंग के तहत नौकरी की नियुक्ति एक साल की होती है। कुशल और अकुशल की श्रेणी के तहत भुगतान होता है। नौकरी के समय दक्षिणा पहले, पगार मिलेगा कि नही गारंटी नही। हालांकि कुछ आउट सोर्सिंग की अच्छी कंपनी है। बेरोजगारी,महगाई, और श्रमिको के शोषण के अलावा विपक्षी दलो के पास कोई मुद्दा नही है। देश का विकास तो लोगो के सामने है। गुजरात की राजनैतिक लाबी भारत देश के अमूमन प्रदेशो मे अपनी लाबी खड़ी कर ली है। जिसमे बड़े बड़े पूंजीपति शामिल है। उत्तर प्रदेश गुजरात माडल की ओर है। बड़ी, बड़ी कंपनी गुजरात की। ठेकेदार गुजरात के। मालिक गुजरात के अधिकांश नौकर यूपी के है। वाराणसी के पिण्डरा विधान सभा क्षेत्र मे करखियाव औद्योगिक क्षेत्र है। अमूमन कंपनी गुजरात की है। अभी हाल ही के दिनो मे बनास अमूल कंपनी का मोदी ने उदघाटन किया है। ठेकेदार गुजरात और अन्य प्रदेश के है। कंपनी मे दो शिफ्ट 12,12 घण्टे काम चलता है। आउट सोर्सिंग के तहत काम करने वाले श्रमिको का शोषण है। पगार कम है। मेहनत ज्यादा है। इनसे अच्छा तो मनरेगा के मजदूर की कमाई है। शायद ऐसा लगता है भारत देश की कंपनीओ मे कुछ ही कंपनीओ मे आठ घण्टे की डियूटी होगी नही तो अमूमन कंपनी 12,12 घण्टे श्रमिको से काम ले रही है। पूँजीपतिओ के खिलाफ आवाज कौन उठाये,यह सोचनीय विषय है। जौनपुर की पावन धरती पर केन्द्रीय मंत्री नितिन गड़करी का आज शुभ आगमन है। भगवान परशुराम की तपोभूमि अयोध्या और काशी नगरी से ज्यादे प्रकाशमान है। भगवान राम आये है। यज्ञ की रक्षा किये है। असुर का विनाश किये है। वेद व्यास की तपोभूमि भी जौनपुर है। इल्म का मरकज है। शिराजे हिन्द है। सूफी संतो की तपोभूमि है। राजनीति मे भी जौनपुर के लोग खास मायने रखते है। मोदी के साथ योगी की चर्चा देश विदेश मे है। योगी के प्रधानमंत्री बनने की भी चर्चा है।योगी की बहुत पापुलर्टी गुजरात लाबी को कत्तई पंसद नही है। राजनीति मे कोई किसी का नही है। एक राजनैतिक दूसरे राजनैतिक को मात देकर खुद सुपर बनने की चेष्टा मन मे रंखे आगे बढ़ रहे है। जगदीश सिंह संपादक