जौनपुर। भारत देश के लोगो ने योग दिवस पर योगाभ्यास किया। मछलीशहर सासंद बीपी सरोज और मड़ियाहू विधायक डा• आरके पटेल, उपजिलाधिकारी लालबहादुर, भाजपा नेता द्वय व्रम्हदेव तिवारी,सीपी सिंह सहित सैकड़ो लोग विकास खण्ड बरसठी के सरसरा गांव मे योग विशेषज्ञ के मार्गदर्शन मे अनेको आसन के माध्यम से योगाभ्यास किया और शारीरिक स्फूर्ति का लाभ मिला।जीवन सफल बनाने और सार्थक करने के अनेक तरीके लोगों के बीच प्रचलित हैं।। इनमें एक सबसे सुगम विधि है-योगाभ्यास। हमारे यहां प्राचीन काल से ही व्यायाम या इसका परिवर्तित रूप योग लोगों के मध्य प्रचलित रहा है। ऋषियों ने इस योग से आत्मा को परमात्मा से जोडऩे का कार्य किया है। मुनियों ने परिभाषित किया है कि जिन साधनों से आत्मा की सिद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है उसे योग कहते हैं। आत्म-दर्शन और आंतरिक प्रेरणा (आत्मा की आवाज) द्वारा किया गया कार्य ही योग है। योग का शाब्दिक अर्थ होता है-चित्तवृत्तियों का निरोध। कहने का आशय है कि मन के समस्त अनावश्यक विचारों को रोककर मन को अभीष्ट ध्येय और प्राकृतिक पदार्थों में नियुक्त करना, उनके यथार्थ स्वरूप को जानना और ईश्वर का साक्षात्कार करना योग है। आज के वर्तमान परिप्रेक्ष्य में जबकि हमारी जीवन-शैली अनेक प्रकार के कारणों से असंतुलित हो गई है तब इसे सही मार्ग पर लाने में योग साधना का बहुत महत्व है। हम योग साधना के माध्यम से अपने जीवन में संतुलन बनाकर अनेक समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं। इस संबंध में यम-नचिकेता संवाद बड़े महत्व का है। नचिकेता को समस्त भौतिक पदार्थों का वरदान देकर यम ने अपना पिंड उससे छुड़ाना चाहा, किंतु नचिकेता के बालमन ने इसे स्वीकार नहीं किया और वह कहने लगा-‘मुझे कृपाकर वह ज्ञान प्रदान कीजिए, जिस ज्ञान का मैं श्रवण कर अमरत्व को प्राप्त कर लूं। मुझे ईश्वरीय तत्व ज्ञान प्रदान करें।’ अंत में यम ने नचिकेता को तत्व ज्ञान प्रदान किया।
इसी तत्व ज्ञान को प्राप्त करने का लक्ष्य हमें अपने जीवन में भी पूरा करना होगा। इसे हम योग साधना के द्वारा अपनी चित्तवृत्तियों पर नियंत्रण करके सहज में ही प्राप्त कर सकते हैं। जैसे ही हमारी चित्तवृत्तियां आध्यात्मिकता की ओर अग्रसर हो जाएंगी, वैसे ही हम भौतिकता के मोह से मुक्त हो जाएंगे। इतना अगर हो गया तो हमारे जीवन की समस्याओं का समाधान हो जाएगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि योग के माध्यम से मन जैसे ही शांत होगा, मन में भगवान का सुमिरन चलने लगेगा। फिर तो इस सुमिरन से हमारे मन का मोह भागेगा और हमारी जीवन शैली ही संपूर्ण रूप से बदल जायेगी।
[ डॉ. विश्राम ]









